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“हे प्रभु, मेरा सेवक घर में लकवे का मारा बहुत दुःखी पड़ा है।”
Matthew 8:6 · इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
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And saying, Lord, my servant lieth at home sick of the palsy, grievously tormented.
“Lord, my servant lies at home, paralyzed and in terrible agony.”
saying, “Lord, my servant lies in the house paralyzed, grievously tormented.”
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3 यीशु ने हाथ बढ़ाकर उसे छुआ, और कहा, “मैं चाहता हूँ, तू शुद्ध हो जा” और वह तुरन्त कोढ़ से शुद्ध हो गया।
4 यीशु ने उससे कहा, “देख, किसी से न कहना, परन्तु जाकर अपने आपको याजक को दिखा और जो चढ़ावा मूसा ने ठहराया है उसे चढ़ा, ताकि उनके लिये गवाही हो।”(लैव्य. 14:2,32)
5 और जब वह कफरनहूम में आया तो एक सूबेदार ने उसके पास आकर उससे विनती की,
6 “हे प्रभु, मेरा सेवक घर में लकवे का मारा बहुत दुःखी पड़ा है।”
7 उसने उससे कहा, “मैं आकर उसे चंगा करूँगा।”
8 सूबेदार ने उत्तर दिया, “हे प्रभु, मैं इस योग्य नहीं, कि तू मेरी छत के तले आए, पर केवल मुँह से कह दे तो मेरा सेवक चंगा हो जाएगा।
9 क्योंकि मैं भी पराधीन मनुष्य हूँ, और सिपाही मेरे हाथ में हैं, और जब एक से कहता हूँ, जा, तो वह जाता है; और दूसरे को कि आ, तो वह आता है; और अपने दास से कहता हूँ, कि यह कर, तो वह करता है।”
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