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“यह इत्र तीन सौ दीनार में बेचकर गरीबों को क्यों न दिया गया?”
John 12:5 · इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
Why was not this ointment sold for three hundred pence, and given to the poor?
“Why wasn’t this perfume sold for three hundred denarii and the money given to the poor?”
“Why wasn’t this ointment sold for three hundred denarii and given to the poor?”
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2 वहाँ उन्होंने उसके लिये भोजन तैयार किया, और मार्था सेवा कर रही थी, और लाज़र उनमें से एक था, जो उसके साथ भोजन करने के लिये बैठे थे।
3 तब मरियम ने जटामासी का आधा सेर बहुमूल्य इत्र लेकर यीशु के पाँवों पर डाला, और अपने बालों से उसके पाँव पोंछे, और इत्र की सुगन्ध से घर सुगन्धित हो गया।
4 परन्तु उसके चेलों में से यहूदा इस्करियोती नामक एक चेला जो उसे पकड़वाने पर था, कहने लगा,
5 “यह इत्र तीन सौ दीनार में बेचकर गरीबों को क्यों न दिया गया?”
6 उसने यह बात इसलिए न कही, कि उसे गरीबों की चिन्ता थी, परन्तु इसलिए कि वह चोर था और उसके पास उनकी थैली रहती थी, और उसमें जो कुछ डाला जाता था, वह निकाल लेता था।
7 यीशु ने कहा, “उसे मेरे गाड़े जाने के दिन के लिये रहने दे।
8 क्योंकि गरीब तो तुम्हारे साथ सदा रहते हैं, परन्तु मैं तुम्हारे साथ सदा न रहूँगा।”(मर. 14:7)
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