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मन अपना ही दुःख जानता है, और परदेशी उसके आनन्द में हाथ नहीं डाल सकता।
Proverbs 14:10 · इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
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The heart knoweth his own bitterness; and a stranger doth not intermeddle with his joy.
The heart knows its own bitterness, and no stranger shares in its joy.
The heart knows its own bitterness and joy; he will not share these with a stranger.
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7 मूर्ख से अलग हो जा, तू उससे ज्ञान की बात न पाएगा।
8 विवेकी मनुष्य की बुद्धि अपनी चाल को समझना है, परन्तु मूर्खों की मूर्खता छल करना है।
9 मूर्ख लोग पाप का अंगीकार करने को ठट्ठा जानते हैं, परन्तु सीधे लोगों के बीच अनुग्रह होता है।
10 मन अपना ही दुःख जानता है, और परदेशी उसके आनन्द में हाथ नहीं डाल सकता।
11 दुष्टों के घर का विनाश हो जाता है, परन्तु सीधे लोगों के तम्बू में बढ़ती होती है।
12 ऐसा मार्ग है, जो मनुष्य को ठीक जान पड़ता है, परन्तु उसके अन्त में मृत्यु ही मिलती है।
13 हँसी के समय भी मन उदास हो सकता है, और आनन्द के अन्त में शोक हो सकता है।
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