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क्योंकि पक्षी के देखते हुए जाल फैलाना व्यर्थ होता है;
Proverbs 1:17 · इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
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Surely in vain the net is spread in the sight of any bird.
How futile it is to spread the net where any bird can see it!
For the net is spread in vain in the sight of any bird;
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14 तू हमारा सहभागी हो जा, हम सभी का एक ही बटुआ हो,”
15 तो, हे मेरे पुत्र तू उनके संग मार्ग में न चलना, वरन् उनकी डगर में पाँव भी न रखना;
16 क्योंकि वे बुराई ही करने को दौड़ते हैं, और हत्या करने को फुर्ती करते हैं। (रोम. 3:15-17)
17 क्योंकि पक्षी के देखते हुए जाल फैलाना व्यर्थ होता है;
18 और ये लोग तो अपनी ही हत्या करने के लिये घात लगाते हैं, और अपने ही प्राणों की घात की ताक में रहते हैं।
19 सब लालचियों की चाल ऐसी ही होती है; उनका प्राण लालच ही के कारण नाश हो जाता है।
20 बुद्धि सड़क में ऊँचे स्वर से बोलती है; और चौकों में प्रचार करती है;
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