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और मन्दिर में से होकर किसी को बर्तन लेकर आने-जाने न दिया।
Mark 11:16 · इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
And would not suffer that any man should carry any vessel through the temple.
And He would not allow anyone to carry merchandise through the temple courts.
He would not allow anyone to carry a container through the temple.
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13 और वह दूर से अंजीर का एक हरा पेड़ देखकर निकट गया, कि क्या जाने उसमें कुछ पाए: पर पत्तों को छोड़ कुछ न पाया; क्योंकि फल का समय न था।
14 इस पर उसने उससे कहा, “अब से कोई तेरा फल कभी न खाए।” और उसके चेले सुन रहे थे।
15 फिर वे यरूशलेम में आए, और वह मन्दिर में गया; और वहाँ जो लेन-देन कर रहे थे उन्हें बाहर निकालने लगा, और सर्राफों की मेजें और कबूतर के बेचनेवालों की चौकियाँ उलट दीं।
16 और मन्दिर में से होकर किसी को बर्तन लेकर आने-जाने न दिया।
17 और उपदेश करके उनसे कहा, “क्या यह नहीं लिखा है, कि मेरा घर सब जातियों के लिये प्रार्थना का घर कहलाएगा? पर तुम ने इसे डाकुओं की खोह बना दी है।”(लूका 19:46, यिर्म. 7:11)
18 यह सुनकर प्रधान याजक और शास्त्री उसके नाश करने का अवसर ढूँढ़ने लगे; क्योंकि उससे डरते थे, इसलिए कि सब लोग उसके उपदेश से चकित होते थे।
19 और साँझ होते ही वे नगर से बाहर चले गए।
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