The Bible › इंडियन रिवाइज्ड वर्जन › Luke 20
तब दाख की बारी के स्वामी ने कहा, ‘मैं क्या करूँ? मैं अपने प्रिय पुत्र को भेजूँगा, क्या जाने वे उसका आदर करें।’
Luke 20:13 · इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
Then said the lord of the vineyard, What shall I do? I will send my beloved son: it may be they will reverence him when they see him.
‘What shall I do?’ asked the owner of the vineyard. ‘I will send my beloved son. Perhaps they will respect him.’
The lord of the vineyard said, ‘What shall I do? I will send my beloved son. It may be that seeing him, they will respect him.’
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10 नियुक्त समय पर उसने किसानों के पास एक दास को भेजा, कि वे दाख की बारी के कुछ फलों का भाग उसे दें, पर किसानों ने उसे पीटकर खाली हाथ लौटा दिया।
11 फिर उसने एक और दास को भेजा, ओर उन्होंने उसे भी पीटकर और उसका अपमान करके खाली हाथ लौटा दिया।
12 फिर उसने तीसरा भेजा, और उन्होंने उसे भी घायल करके निकाल दिया।
13 तब दाख की बारी के स्वामी ने कहा, ‘मैं क्या करूँ? मैं अपने प्रिय पुत्र को भेजूँगा, क्या जाने वे उसका आदर करें।’
14 जब किसानों ने उसे देखा तो आपस में विचार करने लगे, ‘यह तो वारिस है; आओ, हम उसे मार डालें, कि विरासत हमारी हो जाए।’
15 और उन्होंने उसे दाख की बारी से बाहर निकालकर मार डाला: इसलिए दाख की बारी का स्वामी उनके साथ क्या करेगा?
16 “वह आकर उन किसानों को नाश करेगा, और दाख की बारी दूसरों को सौंपेगा।” यह सुनकर उन्होंने कहा, “परमेश्वर ऐसा न करे।”
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