The Bible › इंडियन रिवाइज्ड वर्जन › Acts 28
जब वे आपस में एकमत न हुए, तो पौलुस के इस एक बात के कहने पर चले गए, “पवित्र आत्मा ने यशायाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा तुम्हारे पूर्वजों से ठीक ही कहा,
Acts 28:25 · इंडियन रिवाइज्ड वर्जन
And when they agreed not among themselves, they departed, after that Paul had spoken one word, Well spake the Holy Ghost by Esaias the prophet unto our fathers,
They disagreed among themselves and began to leave after Paul had made this final statement: “The Holy Spirit was right when He spoke to your fathers through Isaiah the prophet:
When they didn’t agree among themselves, they departed after Paul had spoken one message: “The Holy Spirit spoke rightly through Isaiah the prophet to our fathers,
Every translation above is public domain and free to share. Other versions — NIV · ESV · NKJV · NLT · NASB · CSB · AMP — are copyrighted and open on their publishers’ partner site.
22 परन्तु तेरा विचार क्या है? वही हम तुझ से सुनना चाहते हैं, क्योंकि हम जानते हैं, कि हर जगह इस मत के विरोध में लोग बातें करते हैं।”
23 तब उन्होंने उसके लिये एक दिन ठहराया, और बहुत से लोग उसके यहाँ इकट्ठे हुए, और वह परमेश्वर के राज्य की गवाही देता हुआ, और मूसा की व्यवस्था और भविष्यद्वक्ताओं की पुस्तकों से यीशु के विषय में समझा-समझाकर भोर से साँझ तक वर्णन करता रहा।
24 तब कुछ ने उन बातों को मान लिया, और कुछ ने विश्वास न किया।
25 जब वे आपस में एकमत न हुए, तो पौलुस के इस एक बात के कहने पर चले गए, “पवित्र आत्मा ने यशायाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा तुम्हारे पूर्वजों से ठीक ही कहा,
26 ‘जाकर इन लोगों से कह, कि सुनते तो रहोगे, परन्तु न समझोगे, और देखते तो रहोगे, परन्तु न बूझोगे;
27 क्योंकि इन लोगों का मन मोटा, और उनके कान भारी हो गए हैं, और उन्होंने अपनी आँखें बन्द की हैं, ऐसा न हो कि वे कभी आँखों से देखें, और कानों से सुनें, और मन से समझें और फिरें, और मैं उन्हें चंगा करूँ।’ (यशा. 6:9,10)
28 “अतः तुम जानो, कि परमेश्वर के इस उद्धार की कथा अन्यजातियों के पास भेजी गई है, और वे सुनेंगे।” (भज. 67:2, भज. 98:3, यशा. 40:5)
Read Acts 28 in the app The whole chapter